कल किसने देखा हैं (भाग-3)

 

                              कल किसने देखा हैं (भाग-3)



रवि तनेजा धीरे से बोलते है- “अपनी पत्नी के लिए लेटर लिखवाना हैं मुझे,”

ऋषभ हैरान होते हुए- “सर आपको अपनी पत्नी, आई मीन भाभी जी के लिए लेटर लिखवानी हैं मुझसे ? क्यों क्या बात है सर, भाभी जी कही गयी हुई है क्या ?

रवि तनेजा हँसते हुए- “अरे नहीं ऋषभ तुम्हारी भाभी जी कही नहीं गयी हैं यही है,”

ऋषभ एक्साइटेड होते हुए- “तो सर भाभी जी नाराज है क्या आपसे ?”

ऋषभ की बात सुन कर रवि तनेजा खिलखिला कर हँसते हुए- “अरे नहीं भाई नाराज नहीं है तुम्हारी भाभी जी मुझे, थोडा साँस ले लेने दो फिर बताता हूँ,” इतना बोल कर रवि तनेजा अपने चेयर को खिसका कर ऋषभ के करीब लाते हुए- “दरअसल बात ये है ऋषभ की परसों हमारी 27वीं अनेवार्सरी है, तो मैं चाहता हूँ की उनकी सारे गिले शिकवे दूर कर दूँ, ऐसे तो वो मुझसे कुछ बोलती नहीं है लेकिन कुछ रूठी-रूठी थोड़ी चिडचिडी सी जरुर रहती है मुझसे, उन्हें शिकायत है मुझसे की मै उन्हें समय नहीं देता उन्हें कहीं घुमाने के लिए नहीं ले जाता, तो ऋषभ अब मै अपने सारे जिम्मेदारियों से मुक्त हो चूका हूँ, दोनों बच्चो की शादी कर दी है, दोनों बच्चो की जॉब लग चुकी है दोनों सेटल्ड हो चुके है, अब मेरा सारा समय तुम्हारी भाभी जी का है,”

रवि तनेजा की बात सुन कर ऋषभ हँसते हुए एक छोटा सा जवाब देता है- “जी बिलकुल सही बोल रहे है सर आप,”  

रवि तनेजा- “ तो ऋषभ इसीलिए तो तुम्हें बुलाया है, मुझे तुम्हारी भाभी को यही सारी बाते बतानी है, जो शायद मै उन्हें बोल नहीं पाउँगा, इसलिए मुझे तुम्हारी हेल्प चाहिए, ऋषभ कुछ ऐसा लिख दो जिसे पढ़ कर इस एनिवर्सरी उसके सारे गिले शिकवे दूर हो जाय,”

अभी ऋषभ बाहर बेंच पर बैठा ये सारी बाते सोच ही रहा था की रमेश जी आकर ऋषभ के कंधे पर हाथ रखते हुए- “चलिए सर ?”

अपने कंधे पर हाथ के स्पर्श का एहसास होते ही ऋषभ अपने यादो से बाहर आते हुए- “सारी तैयारी हो गयी रमेश जी ?”

रमेश जी- “जी सर, तनेजा सर के गाँव से उनके बड़े भाई आये हुए है, उनका कहना हैं की अंतिम संस्कार के बाद वे लोग तनेजा सर की वाइफ को ले कर गाँव चले जायेंगे, तनेजा सर का अंतिम क्रिया कर्म गाँव से करना चाहते है ये लोग,”

ऋषभ- “अच्छी बात है रमेश जी, रमेश रवि सर का कार्यकाल अभी बाकी था तो आप सारे कागज ठीक से तैयार कर दीजियेगा, ताकि आगे चल कर भाभी जी (रवि सर की वाइफ) को कोई तकलीफ ना हो,”

रमेश जी- “जी सर, सब सही से कर दिया है मैंने,”                                         

 

कुछ ही देर में रवि तनेजा के परिजन रवि तनेजा के बॉडी को ले कर की अंतिम संस्कार के लिए चल दिए, ऋषभ भी उन सब के पीछे बोझिल कदमो से धीरे धीरे चलने लगा, रवि तनेजा का अंतिम संस्कार करते करते और सारा काम निपटाते-निपटाते शाम के करीब 7 बज गये, 7:30 के करीब ऋषभ अपने घर पहुँचा, घर पर रिया (ऋषभ की पत्नी) ऋषभ का बेसब्री से इन्तजार कर रही थी, क्यों की रिया को पहले से ही ऋषभ के बॉस रवि तनेजा की डेथ की खबर मिल चुकी थी इसलिए रिया ऋषभ को उदास देख कर भी ऋषभ से कोई सवाल नहीं पूछती है,

ऋषभ घर पहुँच कर सीधे वाशरूम में चला गया और थोड़ी देर बाद फ्रेश हो कर वाशरूम से बाहर आ कर हॉल में सोफे पर बैठ गया, रिया धीरे से ऋषभ के पास आ कर- “रवि सर की डेथ कैसे हो गयी ? कोई बीमारी थी क्या उन्हें ?”

रिया के सवाल पर ऋषभ एक नजर उठा कर रिया के चेहरे की ओर देखता हैं और एक छोटा सा जवाब देता हैं- “हार्टअटैक (ह्रदय गति ) से,”

रिया- “खाना लगा दूँ ?”

ऋषभ उठ कर अपने बेडरूम की जाते हुए- “नहीं मेरा मन नहीं है,”

रिया भी ऋषभ के पीछे-पीछे बेडरूम में आ जाती है और बड़े प्यार से ऋषभ के सर पर हाथ रख- “आप ठीक तो है ना जी,”

रिया के इस सवाल पर ऋषभ मुस्कुराते हुए रिया के हथेलियों को अपने हथेलियों में ले कर- “मै बिलकुल ठीक हूँ, तुम सो जाओ, सुबह बात करते है,” इतना बोल कर ऋषभ अपनी आँखे बंद कर लेता है, थोड़ी देर रिया वैसे ही ऋषभ के बालो को सहलाती रहती हैं, और जब रिया को तसल्ली हो गया की ऋषभ सो गया है तब रिया भी सोने चली जाती है,

हमेशा की तरह रिया ऋषभ से पहले उठ गयी और नाहा धो कर ऋषभ और बच्चो के लिए सुबह का ब्रेकफास्ट बनाया, लंच पैक किया, बच्चो को स्कूल भेज कर ऋषभ को उठाने बेडरूम में जाती है,

रिया- “ऋषभ उठो, आज ऑफिस नहीं जाना है क्या ?”

ऋषभ ऊँघते हुए अपनी आँखे खोलता है, और सामने रिया को खड़ा देख कर थोड़ी देर के लिए अपलक देखता रह जाता है, रिया का वही चिर-परिचित मुस्कान, कान के पास जुड़े से बाहर निकल बालो के दो लट रिया के कंधे को चुमते हुए, माथे पर पर बड़ी से लाल बिंदी, और मांग में सिंदूर, ऋषभ रिया के चेहरे में ही गुम था की रिया ऋषभ को झकझोरते हुए- “अरे ऐसे क्या देख रहे है ? आज ऑफिस नहीं जाना है क्या ?” रिया की आवाज सुन कर ऋषभ अपने ख्यालो से बाहर आता है अपने सर को हिलाते हुए- जाना है यार, ऐसे भी ऑफिस में ज्यादा काम होगा, कल ऑफिस बंद होने के कारण कल का काम  पेंडिंग हो रह गया, सारे काम मुझे ही पूरा करना होगा, और अब तो तनेजा सर भी........ जानेजा सर का नाम जुबान पर आते ही ऋषभ अपनी लाइन पूरा किये बिना ही चुप हो जाता है, ऋषभ तो चुप हो जाता है लेकिन रिया भनभनाने लगती है,

रिया- “हाँ काम, काम, काम तुम्हें कभी काम से फुर्सत मिलती है क्या ? कल ही बड़ी दीदी का फ़ोन आया था, दिल्ली में फ्लैट खरीदा है,

 हमें भी पूजा में बुला रहे है,”

ऋषभ रिया की बात सुन कर बाथरूम से ही चिल्ला कर- “अरे टावल दोगी या चिल्लाते ही रहोगी ?”

रिया दौड़ कर वाशरूम के बाहर से ऋषभ को टावल पकडाते हुए- “खुद से टावल भी ले कर वाशरूम में नहीं जाते है,” टावल पकड़ा कर रिया किचेन की ओर भागती है क्यों की किचन में रिया ने तवे पर रोटी डाल रखा था,

थोड़ी देर में ऋषभ तैयार हो कर डायनिंग टेबल पर बैठ जाता है, रिया ऋषभ के प्लेट में गरम-गरम  रोटी डालती है, लेकिन मुहँ से कुछ नहीं बोलती है, ऋषभ रिया को मुहँ फुलाए देख कर- “अरे ऐसे मुहँ क्यों फुलाई हो, तुम चली जाना दीदी के घर, मैंने तुम्हें कभी रोका है क्या ?”

रिया- “हाँ वो तो मैं जाउंगी ही लेकिन हर बार की तरह सारे लोगो के सामने मुझे शर्मिंदा होना पड़ेगा, सभी मेरा मजाक बनायेंगे, जीजा जी को पैसे कमाने से फुर्सत ही नहीं मिलती है,” ऋषभ रिया के किसी भी बात का जवाब दिए बिना रोटी खाए जा रहा था, ऋषभ की ओर से कोई जवाब ना पा कर रिया गुस्से से झुंझलाते हुए- “तुम्हें तो मेरी तरफ देखने भी की फुर्सत नहीं है,”

रिया की इस बात को सुन कर ऋषभ शरारत भरी नजरो से रिया की देखते हुए- “देख तो रहा था सुबह, तब तो तुमने कहा की ऐसे क्यों देख रहे हो और अभी बोल रही हो की मैं तुम्हारी तरफ देखता भी नहीं हूँ,”

ऋषभ की बात सुन कर रिया झेप गयी और ना चाहते हुए भी रिया के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी, रिया के चेहरे पर मुस्कराहट देख कर ऋषभ हँसते हुए- “अरे मैं देखता हूँ ना, छुट्टी की अर्जी लगा देता हूँ ऑफिस में, देखो शायद छुट्टी मिल जाए,”

ऋषभ नास्ता फिनिश कर अपने ऑफिस के लिए निकल जाता है, ऋषभ ने रिया से बोल तो दिया था की ऑफिस में छुट्टी के लिए एप्लीकेशन देगा, लेकिन उसे अच्छी तरह से पता था की उसे छुट्टी नहीं मिलने वाली है, इसी उधेड़-बून में ऋषभ ऑफिस पहुँचता है, ऑफिस में आज भी सन्नाटा था, सभी स्टाफ अभी तक रवि तनेजा के डेथ से उबर नहीं पाए थे, रवि तनेजा के डेथ के सदमे से तो ऋषभ भी नहीं निकल पाया था,

कुछ दिनों तक ऑफिस का माहौल ऐसे ही गमगिन बना रहा, ऋषभ भी रवि तनेजा के साथ की आखरी मुलाकात भूल नहीं पा रहा था, की तभी ऑफिस में कुछ ऐसा हुआ जिसने ऋषभ को अंदर तक हिला दिया,.........

 आगे की कहानी अगले भाग में.........

 


Comments

  1. "कल किसने देखा हैं" का तीसरा भाग भावनात्मक रूप से गहराई में उतरता है। कहानी में अचानक से हुए एक दुखद मोड़ ने ना सिर्फ पात्रों की भावनाओं को झकझोर दिया।

    रवि तनेजा, अपनी पत्नी के लिए एक प्रेमपूर्ण पत्र लिखवाने की इच्छा रखते हैं, जिसमें वह अपनी पत्नी के साथ समय बिताने की इच्छा जताते हैं। लेकिन इसी दौरान उनकी अचानक मृत्यु हो जाती है, जिससे कहानी में एक गहरा मोड़ आता है। ऋषभ की उदासी और उसके साथ रवि तनेजा की अंतिम मुलाकात का चित्रण भावुक कर देता है।

    कहानी का यह हिस्सा न केवल रिश्तों की नाजुकता और अनकही बातों की गहराई को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि जीवन कितना अप्रत्याशित हो सकता है। इसके अलावा, ऋषभ और उसकी पत्नी रिया के बीच का संवाद, जिसमें जीवन की व्यावहारिक चुनौतियाँ और आपसी समझदारी को दर्शाया गया है, कहानी को वास्तविकता के करीब लाता है।

    कुल मिलाकर, "कल किसने देखा हैं" का तीसरा भाग जीवन की अनिश्चितताओं और रिश्तों की बारीकियों को गहराई से समझाने में सफल रहा है। पाठक को यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि जीवन में अनकही बातों को समय रहते व्यक्त करना कितना महत्वपूर्ण है।

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