"बजर की बात"

  "बजर की बात"



 "बजर की बात"

आज मेरे हस्बैंड ने टर्की से एक तस्वीर भेजी। वह तस्वीर किसी पोल की थी, जहाँ एक बजर लगा हुआ था। उन्होंने बताया कि वहाँ इस बजर को बजाने पर आसपास की टैक्सियाँ तुरंत आ जाती हैं। यह टैक्सी बुलाने का एक सरल और सुविधाजनक तरीका है, जिसे टर्की के लोग खूब इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने मज़ाक में कहा कि अगर ऐसा बजर भारत में भी लगा दिया जाए, तो कितना अच्छा हो! 


उस वक्त मैंने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन बाद में इस पर सोचने लगी। अगर भारत में ऐसा हो, तो टैक्सी वालों की हालत क्या होगी? यहाँ तो पहले से ही टैक्सियों की भरमार है। एक बजर बजेगा, और एक साथ कई टैक्सियाँ आकर खड़ी हो जाएंगी। इस व्यवस्था को यहाँ संभालना इतना आसान नहीं होगा।


इस बात से मुझे एक पुरानी घटना याद आ गई। उस समय मेरा बेटा छोटा था, सिर्फ चार महीने का, और मेरी बेटी तीन साल की थी। वह प्ले स्कूल जाती थी, और हर दिन सुबह उसे तैयार करके स्कूल छोड़ने जाती थी। बेटे को खिलाने, नहलाने और सुलाने के बाद थोड़ी देर आराम करने की सोचती थी, लेकिन तभी दरवाजे की घंटी बज जाती। मैं दौड़कर दरवाजा खोलती, पर वहाँ कोई नहीं होता। बार-बार ऐसा होता, और फिर मेरा बेटा जग जाता। 


लगभग 15 दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा। मैं परेशान हो चुकी थी और समझ नहीं पा रही थी कि यह कौन कर रहा है। फिर एक दिन पता चला कि मेरे बगल में रहने वाला एक लड़का मुझे परेशान कर रहा था। उस दिन मेरा गुस्सा चरम पर था। जैसे ही घंटी बजी, मैंने पास पड़ा एक डंडा उठाया और घंटी पर जोर से मारा। घंटी टूटकर लटक गई, और उसके बाद से न घंटी बजी, न वह लड़का तंग करने आया। 


आज जब मेरे हस्बैंड ने वह बजर वाली तस्वीर भेजी, तो मुझे यह पुरानी घटना याद आ गई। मैं सोचने लगी कि अगर ऐसा बजर भारत की हर सड़क पर लगा दिया जाए, तो टैक्सी वालों की क्या हालत होगी? यहाँ की जनसंख्या और टैक्सियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि एक बजर बजाते ही सैकड़ों टैक्सियाँ आकर सामने खड़ी हो जाएंगी। हो सकता है कि टर्की में लोग इसे मैनेज कर लेते हों, लेकिन भारत में इसे संभालना आसान नहीं होगा। 


बस, यही सब सोचते हुए मैंने उस तस्वीर को फिर से देखा और मुस्कुरा दी।

      लेखिका - अल्पना सिंह 

Comments

Popular Posts