पिया बसंती (भाग-1)

 पिया बसंती 


प्यार, इश्क और मुहब्बत की बातें करने से सभी कतराते हैं, लेकिन सच तो ये हैं की ऐसा कोई नहीं जो इसके एहसास से बच पाया हो, प्यार पाने की इच्छा हर किसी के दिल में होती है। कोई हो जिससे उनकी नज़रें चार हों, कोई ऐसा पल उनकी ज़िंदगी में भी आए जब लब खामोश और आँखें बातें कर रही हों। लेकिन ये भी सच हैं की प्रेमी या प्रेमिका का प्यार हर किसी के किस्मत में नहीं होता,
जी, बिलकुल सही समझ रहे हैं आप। आज से मैं एक लव स्टोरी शुरू करने जा रही हूँ, कहानी पहले प्यार की, दिल के पहले धड़कन की, जिसे महसूस तो सभी ने किया होगा। चलिए, जिसने भी इस पहले एहसास को महसूस किया हो, मेरी कहानी पढ़कर कमेंट कर जरूर बताएं। आप सभी के साथ की जरूरत है मुझे अपनी कहानी पूरी करने में। यदि आप सभी कमेंट करेंगे तो मुझे अपनी कहानी पूरी करने में मदद मिलेगी। इसलिए आप सभी अपना साथ बनाए रखें।

कहानी के मुख्य पात्र                                             

  • सुमी - कहानी की नायिका, और यह कहानी पूरी तरह से नायिका के दृष्टिकोण से लिखी गई है। यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है। इसलिए प्लीज पर्सनल कमेंट ना करे,

पिया बसंती                                                                 

मैं अपनी बुआ के घर उनके पोते की शादी में आई हुई थी। शाम के वक्त मैं अपनी बुआ के साथ उनके घर के छत पर खड़ी थी कि मैंने देखा, कई लड़के-लड़कियाँ, यही कोई 15-16 साल के, गली में इधर-उधर टहल रहे थे। मैंने बुआ से पूछा, "क्या बात है बुआ? आपके मुहल्ले में तो काफी चहल-पहल है?"
बुआ हंसकर बोलीं, "अरे, बोर्ड एग्जाम चल रहा है ना!"
बुआ ने हंसकर कहा, तो मैं अच्छी तरह समझ गई थी कि उनका इशारा किस ओर था। बोर्ड एग्जाम सुनकर मेरे चेहरे पर लालिमा छा गई। इस बोर्ड एग्जाम से मेरी एक मीठी याद जुड़ी थी।

बात उन दिनों की है जब मैं बोर्ड एग्जाम देने के लिए अपने बुआ के घर आई हुई थी। यह पहली बार था जब मैं गाँव से बाहर निकली थी। गाँव की पतली-संकरी गलियों में घूमते हुए मुझे कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ था। यह एहसास कुछ नया-नया था। मम्मी कितनी बार डांट लगाती थीं, "दिन भर गाँव घूमती रहती हैं, बड़ी हो गई हैं अब तुम, कुछ घर के काम में हाथ बटाया करो। ना जाने कब अकल आएगी इस लड़की को।"
तब मैं मन ही मन सोचती थी, "ये मम्मी किस अकल की बात करती हैं? सारी अकल तो आ गई है मुझे। मम्मी बेवजह मेरे ऊपर चिल्लाती रहती हैं।"

एग्जाम का पहला दिन। मैं अपनी सहेलियों के साथ पेपर देने निकली, थोड़ी डरी-सहमी। हम सभी सहेलियाँ अपने कार्डबोर्ड को सीने से चिपकाए स्कूल के ग्राउंड में पहुँचीं, जहाँ हमारा सेंटर था। ग्राउंड में चहल-पहल थी। ढेर सारे लड़के-लड़कियाँ रंग-बिरंगे कपड़ों में इधर-उधर घूम रहे थे। आज एग्जाम का पहला दिन था, सभी के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही थीं। एग्जाम शुरू होने में 20 मिनट थे, इसलिए क्लास रूम नहीं खुला था। हम सहेलियाँ एक किनारे खड़ी होकर क्लास रूम के खुलने का इंतज़ार कर रही थीं। तभी मेरी नज़र एक लड़के पर पड़ी, जो हमारे पीछे खड़ा कब से मुझे घूर रहा था। मैंने उसे इग्नोर किया और सहेलियों से बातें करने लगी।

थोड़ी देर में क्लास रूम का दरवाज़ा खुला और हम सभी अपने-अपने क्लास रूम में चले गए। लगभग 2 घंटे बाद हम सभी सहेलियाँ अपना पेपर खत्म कर क्लास रूम से बाहर आईं और स्कूल ग्राउंड में एक जगह खड़े होकर अपना पेपर डिस्कस कर रही थीं, तभी मेरी नजर उसी लड़के पर पड़ी। वो लड़का ठीक हमारे पीछे आकर खड़ा हो गया और मेरी तरफ तिरछी नज़र से देखकर मुस्कुरा रहा था। मैंने भी एक बार तिरछी नज़र से उसकी ओर देखा फिर एक बार उसे इग्नोर कर अपनी सहेलियों से बातें करने लगी।

मैं तो उसे इग्नोर कर रही थी, लेकिन ना जाने क्यों आज उस लड़के का यूं मेरी तरफ बार-बार तिरछी नज़र से देखना, मेरी तरफ देखकर मुस्कुराना, मेरे दिल की धड़कन बढ़ा रहा था। यह पहली बार था जब कोई मेरे दिल पर दस्तख़त दे रहा था, या शायद मेरे दिल ने इस दस्तख़त को पहली बार महसूस किया था। ना चाहते हुए भी मैं भी एक नज़र उठाकर तिरछी नज़र से उसकी ओर देख रही थी। आखिर मेरा उसकी ओर यूं बार-बार सबकी नज़रों से बचाकर देखना मेरी सहेलियों की नज़र से कब तक छिपा रहता? आखिर मेरी सबसे करीबी सहेली मितु, जो मेरे ही गाँव की थी, मेरी ओर देखकर आँखों के इशारे से बोली, "देख सुमी, वो लड़का कब से तुझे ही घूर-घूर कर देख रहा है। सुबह भी मैंने देखा था, वो तेरे पीछे खड़ा सिर्फ तुझे ही देख रहा था।"
मितु की बात सुनकर मैं शरमा गई, मेरे गाल गुलाबी हो गए। मैंने खुद के इमोशन को छुपाते हुए मितु को झिड़कते हुए बोली, "चल हट, ऐसा कुछ नहीं है। ऐसे वो मुझे क्यों देखेगा भला? वो तुम्हीं लोगों को देख रहा होगा। चल, अब जल्दी घर चल, थोड़ी और देर हुई तो पापा गुस्सा हो जाएंगे।"

उस दिन बोलने को तो मैंने बोल दिया कि ऐसा कुछ नहीं है, लेकिन ये मेरा दिल ही जानता था कि मेरे दिल में कितनी हलचल मची थी। उसका मेरी तरफ तिरछी नज़र से देखना मेरे दिल पर क्या असर कर रहा था। उसका सावला-सलोना मुस्कुराता चेहरा, बड़ी-बड़ी आँखें, सारी रात मेरी आँखों के आगे घूमता रहा। उसका बार-बार तिरछी नज़र से मेरी ओर देखना और मेरी ओर देखकर मुस्कुराना, ना जाने क्यों मेरी दिल की धड़कनें बढ़ा रहा था। वो सारी रात मेरी आँखों ही आँखों में करवटे बदलते गुजर गया। उस रात मैं एक पल भी सो नहीं पाई।

सुमी के पिया बसंती की आगे की कहानी अगले भाग में...

    लेखिका- अल्पना सिंह

 

 

 

 

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