प्यार के रास्ते,(हिंदी कहानी )
प्यार के रास्ते
पार्क के एक कोने
में खड़ी रूही बार-बार अपना मोबाइल देख रही थी और मन ही मन सोच रही थी, "ये अवि अभी तक क्यों नहीं आया?" एक अनजाने डर से रूही का दिल बैठा जा रहा
था। थोड़ी देर इंतज़ार करने के बाद, जब उसे सहन नहीं हुआ, तो उसने अवि को फोन मिलाने का निर्णय लिया। इसी समय उसका
फोन बज उठा। रूही ने झट से फोन उठाया और हड़बड़ाते हुए बोली, "अवि, कहाँ हो? मैं कब से पार्क
में तेरा इंतज़ार कर रही हूँ।"
अवि: "मैं पार्क के बाहर ही खड़ा हूँ।"
रूही: "अरे, तू पार्क के बाहर क्यों खड़ा है? अंदर आ ना। देख, कुछ ही देर में सुबह हो जाएगी और चारों
ओर उजाला फैल जाएगा। फिर सुबह-सुबह पार्क में टहलने वाले लोग आने लगेंगे।"
इतना बोलकर रूही थोड़ी देर के लिए रुक गई, शायद दूसरी तरफ से अवि के जवाब का इंतज़ार कर रही थी। लेकिन
अवि का कोई जवाब ना पाकर, रूही धीरे से फुसफुसाई, "पता है, कितनी मुश्किल से मम्मी-पापा को सोता हुआ छोड़कर आ रही हूँ
मैं। अगर तू थोड़ी देर और नहीं आया, तो मैं वापस अपने घर लौट जाऊँगी।"
इस बार अवि ने
धीरे से कहा, "क्यों, आने का मन नहीं कर रहा था तेरा?"
रूही: "नहीं, अवि, ऐसी बात नहीं है, लेकिन उन्हें सोता छोड़कर आने का मन नहीं कर रहा था। पता
नहीं, मेरे घर से भागकर शादी करने के बाद ना
जाने कब तक गुस्सा रहेंगे।"
अवि: "इसीलिए
तो मैं बोल रहा हूँ, तू एक बार फिर सोच ले। प्यार अपनी जगह है, शादी अपनी जगह।"
रूही: "मैंने
बहुत सोच लिया और समझ भी लिया। अब कुछ नहीं सोचना मुझे। मम्मी-पापा को पहले से
मालूम था कि तू मुझे बहुत पसंद है और मैं तेरे साथ ही शादी करना चाहती हूँ, लेकिन फिर भी..."
अवि: "लेकिन, मेरी जान, तुम्हारे मम्मी-पापा अपनी जगह बिलकुल सही हैं।"
अवि की बात सुनकर
रूही का दिमाग एकदम से भन्ना गया। वो गुस्से से अपने दांत पिसते हुए बोली, "मतलब?"
अवि: "मतलब, अगर मैं भी तुम्हारे मम्मी-पापा की जगह
होता ना, तो वही फैसला लेता जो इस वक्त तुम्हारे
मम्मी-पापा ने लिया है। लेकिन..."
रूही गुस्से से:
"लेकिन क्या, अवि? तू साफ-साफ बोल, क्या चल रहा है तेरे दिल में? तू मुझसे प्यार तो करता है ना?"
अवि हँसकर:
"मेरी जान, रूही, प्यार तो मैं सिर्फ तुझी से करता हूँ और हमेशा करता रहूँगा।
मेरे दिल में मेरी जिंदगी में जो तेरी जगह है, ना, कोई दूसरा नहीं ले सकता। लेकिन..."
कुछ बोलते-बोलते अवि रुक गया।
अवि की बात सुनकर
रूही का गला भर आया। वह रुंधे गले से बोली, "लेकिन... लेकिन क्या, अवि?"
अवि धीरे से:
"लेकिन, रूही, मैं अब तुझसे शादी नहीं करना चाहता। देख, रूही, ये सच है कि हम दोनों ने साथ में BPSC का एग्जाम दिया था। तू पास हो गई और मैं
फेल। तू अब टीचर बन गई है, और मैं ठहरा आवारा निकम्मा अवि।
तेरी-मेरी जोड़ी कैसे निभेगी, बोल?"
रूही: "लेकिन, अवि, एक बार फेल होने से तू हर बार फेल ही होगा, ये कोई ज़रूरी तो नहीं।"
अवि: "रूही, फिलहाल तो तू पास हो गई है और मैं फेल।
और कोई भी पिता अपनी कमाऊ बेटी का हाथ किसी बेरोजगार लड़के के हाथ में नहीं देना
चाहेगा। मैं भी नहीं।"
इतना बोलकर अवि
चुप हो जाता है। अवि की बात सुनकर रूही एकदम शून्य पड़ जाती है। थोड़ी देर के लिए
अवि और रूही के बीच खामोशी छा जाती है। थोड़ी देर चुप रहने के बाद, अवि खामोशी को तोड़ते हुए धीरे से बोलता
है, "एक बात और बोलना चाहता हूँ, रूही। तू सोच जरा, हम दोनों ने शादी कर ली और हमारी एक बेटी
हुई। और एक दिन वो हम दोनों को सोता हुआ छोड़कर घर से भाग गई, तो उस दिन हम दोनों पर क्या गुजरेगी? जरा सोच कर देखना। इसलिए, रूही, मैं तुझसे प्यार तो करता हूँ, लेकिन शादी नहीं कर सकता।"
इतना बोलकर अवि
फोन काट देता है। रूही दौड़कर पार्क के बाहर निकलकर गली में आती है और चारों तरफ
देखने लगती है, लेकिन अवि तब तक वहाँ से जा चुका था।
रूही थके कदमों से धीरे-धीरे घर के अंदर आती है तो देखती है कि उसके मम्मी-पापा
दोनों जाग गए थे और दरवाजे पर ही खड़े थे। रूही कुछ नहीं बोलती, बस धीरे-धीरे चलती हुई अपने कमरे में चली
जाती है और अपने बिस्तर पर औंधे मुंह लेटकर रोने लगती है। रोते-रोते रूही कब सो गई, उसे खुद पता नहीं चला।
सुबह जब सोकर उठी, तो घर में चहल-पहल थी। रूही उठकर हॉल में
आती है तो देखती है अवि अपने मम्मी-पापा के साथ हॉल में बैठा हंस रहा था।
रूही के पापा आगे
बढ़कर रूही के कंधे पर प्यार से हाथ रखते हुए कहते हैं, "बेटा, मेरा दामाद सरकारी नौकरी वाला हो, ये ज़रूरी नहीं है, लेकिन वो एक अच्छा इंसान हो, ये ज़रूरी है। और बेटा, जिसे मैं पसंद करूँ, वो सही इंसान होगा, ये भी ज़रूरी नहीं। तुम्हारी पसंद भी सही
हो सकती है।"
लेखिका: अल्पना
सिंह
Nice Story
ReplyDelete"प्यार के रास्ते" में रूही और अवि के बीच के प्रेम और द्वंद्व को दर्शाती है, जहाँ दोनों अपने रिश्ते और अपने-अपने जीवन की वास्तविकताओं से जूझ रहे हैं। रूही का अपने माता-पिता को छोड़कर अवि के साथ जीवन बिताने का निर्णय और अवि का बेरोजगारी की वजह से अपने आत्म-सम्मान के कारण उससे शादी से इनकार करना, इस कहानी के मुख्य द्वंद्व हैं।
ReplyDeleteअवि अपने भविष्य को लेकर चिंतित है और सोचता है कि वह एक योग्य जीवनसाथी नहीं बन सकता क्योंकि उसकी वर्तमान स्थिति रूही के परिवार की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरती। रूही उसे सांत्वना देने का प्रयास करती है, लेकिन अवि अंततः उससे दूरी बनाने का फैसला करता है ताकि वह खुद को और अपने परिवार को किसी असहज स्थिति में न डाले।
अंत में, रूही के माता-पिता अवि के चरित्र को उसकी नौकरी से ऊपर रखते हुए, उसे स्वीकार कर लेते हैं। यह कहानी न केवल प्रेम, त्याग, और आत्म-सम्मान की गहराइयों को छूती है बल्कि यह भी सिखाती है कि जीवनसाथी का चुनाव उसके चरित्र के आधार पर होना चाहिए, न कि उसकी आर्थिक स्थिति पर।