कार्तिक मास में आवला पूजन
कार्तिक मास में आवला पूजन
मेरे घर के बागीचे में कई पेड़ हैं, जिनमें आवला का पेड़ विशेष महत्व रखता है। हर साल कार्तिक मास में, मेरी माँ मिट्टी के दिए बनाकर एक दीपक आवले के पेड़ और एक दीपक तुलसी के पेड़ के नीचे रखती थीं। यह परंपरा अब मैंने भी अपनाई है। हर शाम, जब दीपक जलता है, तो वह मेरे बचपन की यादों को ताजा कर देता है।
आवला पूजन का धार्मिक महत्व अत्यधिक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, आवला के पेड़ पर भगवान विष्णु का वास होता है, और इसे सर्वदेवों का निवास माना जाता है। कार्तिक शुक्ल नवमी का दिन, जिसे आवंला नवमी कहा जाता है, विशेष पुण्य प्राप्ति का दिन है। इस दिन आवले के पेड़ के नीचे पूजा करने से अक्षय सौभाग्य की प्राप्ति होती है, और यह मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा से सभी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है।
आवला का फल अमृत फल के रूप में जाना जाता है। इसमें विटामिन सी की प्रचुरता होती है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। इसे नियमित रूप से खाने से न केवल स्वास्थ्य बल्कि सुंदरता में भी सुधार होता है। मेरे दादा जी कहा करते थे कि एक आवला रोज खाने से हमेशा स्वस्थ और सुंदर बने रह सकते हैं। यह सिर्फ शरीर के लिए नहीं, बल्कि मन और आत्मा के लिए भी लाभकारी है।
आवला न केवल हमारे स्वास्थ्य का ध्यान रखता है, बल्कि यह हमारी परंपराओं और संस्कृतियों को भी जोड़ता है। जब हम अपने घर के बागीचे में आवले का पूजन करते हैं, तो यह न केवल हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा है, बल्कि हमारे बच्चों को भी इन परंपराओं से जोड़ने का एक माध्यम है।
इस प्रकार, आवला सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है, जो हमें स्वास्थ्य, सौंदर्य और आध्यात्मिक संतोष प्रदान करता है।
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