चित्रगुप्त पूजा और भाई दूज
चित्रगुप्त पूजा और भाई दूज
चित्रगुप्त पूजा दीपावली के महापर्व का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो गोवत्स द्वादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया को संपन्न होता है। इस दिन भगवान चित्रगुप्त जी महाराज की पूजा की जाती है, जिन्हें देवताओं के लेखपाल और यमराज के सहायक के रूप में पूजा जाता है। उनका कार्य मनुष्यों के अच्छे-बुरे कर्मों का लेखा-जोखा रखना है। मान्यता है कि मनुष्यों को उनके कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त होता है और उनके जीवन तथा मृत्यु की अवधि का हिसाब भी उनके कर्मों के अनुसार लिखा जाता है।
चित्रगुप्त जी का जन्म इसी दिन हुआ था, इसलिए कायस्थ समुदाय के लोग विशेष रूप से इस दिन उनकी पूजा करते हैं। उन्हें ब्रह्मा जी का पुत्र माना जाता है और उनकी पूजा में कलम, दवात और सफेद कागज का विशेष महत्व होता है। पूजा के दौरान श्रद्धालु हल्दी लगाकर कागज पर "ॐ गणेशाय नमः" लिखते हैं और भगवान को फल-फूल, मिठाई और नवेद्य अर्पित करते हैं।
भाई दूज, जिसे यम द्वितीया भी कहा जाता है, चित्रगुप्त पूजा के साथ मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए विशेष पूजा करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यमराज को उनकी बहन यमुना से यह वरदान मिला था कि जो भी व्यक्ति अपनी बहन के घर आएगा, उसे वह तिलक करके भोजन कराएगी। इस प्रक्रिया से उसके भाई की अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।
भाई दूज की पूजा का समय दोपहर 12 बजे से रात 12 बजे तक का होता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के लिए प्रेम और स्नेह के प्रतीक के रूप में विशेष व्यंजन तैयार करती हैं।
इस शुभ अवसर पर सभी को भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा की हार्दिक बधाई! यह पर्व न केवल रिश्तों को मजबूत बनाता है, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं को भी संजोता है।
आप सभी इस दिन को खुशियों और प्रेम के साथ मनाएं और एक-दूसरे के साथ अच्छे संबंध बनाए रखें।
Alpna singh
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