सतर्कता में ही समझदारी है (बच्चियों के साथ हो रहे साइबर क्राइम)


 

सतर्कता में ही समझदारी है

बच्चियों के साथ हो रहे साइबर क्राइम

मीना एक स्कूल टीचर हैं और उनके पति रमण एक बैंक में काम करते हैं। मीना की दो बेटियाँ हैं – बड़ी बेटी मितु, जो कक्षा 10 में पढ़ाई कर रही है, और छोटी बेटी, जो कक्षा 6 में है। उनका परिवार खुशहाल था, लेकिन हाल ही में मीना अपनी बड़ी बेटी मितु को लेकर परेशान हो गई थीं। जब से रमण ने मितु को नया मोबाइल दिलवाया था, मितु दिन-रात मोबाइल में ही डूबी रहती थी। सोते-जागते, खाना खाते हुए, हर वक्त उसके हाथ में मोबाइल रहता था। मीना को उसकी यह आदत बहुत खलने लगी थी।
आजकल साइबर क्राइम की खबरें हर जगह थीं – न्यूज़ चैनल्स और अखबारों में छोटी लड़कियों को शिकार बनाए जाने की घटनाएँ सुर्खियाँ बन रही थीं। ऐसे में मीना की चिंता और बढ़ गई थी। वह जानती थीं कि मोबाइल के जरिए बच्चों को बहुत आसान तरीके से जाल में फंसाया जा सकता है।

जब मीना मितु को समझाने जातीं, तो मितु गुस्से में आकर कह देती, "मम्मी, आप क्यों पुरानी बातें करती हैं? अब तो सब कुछ मोबाइल से होता है। ये वही समय नहीं है जब आप थीं, अब तो सब कुछ ऑनलाइन है, चाहे वो पढ़ाई हो या दोस्ती।"
मीना यह सुनकर चुप हो जातीं, क्योंकि वह जानती थीं कि मितु अब बड़ी हो रही है, और उसे अपने फैसले लेने का अधिकार है।

फिर मीना ने सोचा, इस बारे में रमण से बात करना सही रहेगा।

मीना: "रमण, मितु अब दिन-रात मोबाइल में घुसी रहती है। तुम्हें नहीं लगता कि हमें इसे लेकर कुछ कदम उठाने चाहिए?"
रमण: "तुम भी ना मीना, हमेशा टेंशन ले लेती हो। मितु हमारी बेटी है, कुछ नहीं होगा।"
मीना: "लेकिन रमण, मैंने उसकी चैट्स पढ़ी हैं। ज्यादा तो नहीं, लेकिन कुछ बातें ठीक नहीं थीं।"
रमण थोड़ा नाराज होकर बोले, "क्या जरूरत थी तुम्हें उसकी चैट्स पढ़ने की? वह बड़ी हो रही है, उसे प्राइवेसी चाहिए। लड़कियाँ इस उम्र में सहेलियों से ऐसी बातें करती हैं। तुम ज्यादा चिंता कर रही हो।"
फिर थोड़ी देर रुककर रमण ने मीना को समझाया, "देखो मीना, मितु की उम्र ऐसी है, हार्मोनल बदलाव हो रहे हैं। लड़कियाँ अपनी सहेलियों के साथ ऐसे ही बातें करती हैं। तुम थोड़ा भरोसा रखो, बच्चों पर विश्वास करना सीखो।"
रमण की बातों से मीना को थोड़ी राहत मिली, लेकिन वह फिर भी चिंतित थीं। मितु का स्वभाव और मोबाइल के प्रति उसकी निर्भरता उन्हें परेशान कर रही थी।

फिर एक दिन ऐसा हुआ जिसने सब कुछ बदल कर रख दिया। मितु स्कूल से आई तो बहुत उदास दिख रही थी। मीना ने पूछा, "क्या हुआ बेटा, तुम्हारे मुरझाए हुए चेहरे की क्या वजह है?"
मितु रोते हुए बोली, "मम्मी, स्कूल की कुछ लड़कियों की नूड फोटो वायरल हो गई हैं।" मीना का दिल धक से रह गया। वह घबराते हुए बोलीं, "क्या उनमें तुम्हारी भी फोटो तो नहीं है?"
मितु तुरंत कहने लगी, "नहीं, मम्मी, मेरी कोई फोटो नहीं है। वो लड़कियाँ भी ऐसी नहीं हैं, मैम ने बताया कि किसी ने किसी ऐप का मिसयूज करके ऐसा किया है।"
यह सुनकर मीना को थोड़ी राहत मिली, लेकिन फिर भी वह घबराई हुई थीं। मीना ने मितु को ढाढस बंधाया और फिर मितु की सहेली के माता-पिता से संपर्क किया।
वह बहुत जल्दी स्कूल पहुंचीं और वहाँ उन्होंने पाया कि स्कूल ने तुरंत पुलिस को सूचित किया था। मीना को यह जानकर तसल्ली हुई कि स्कूल ने तुरंत एक्शन लिया था। पुलिस जांच में यह सामने आया कि स्कूल के दो लड़कों ने किसी ऐप का मिसयूज किया था और लड़कियों की आपत्तिजनक तस्वीरें ली थीं। उन लड़कों के माता-पिता को भी बुलाया गया और कड़ी कार्रवाई की गई।
मीना को यह जानकर राहत मिली कि पूरे मामले को समय पर निपटाया गया था और वह किसी बड़े स्कैंडल में नहीं बदला। स्कूल की तरफ से त्वरित प्रतिक्रिया ने मामले को छोटा और नियंत्रित कर दिया था।

यह घटना मीना के परिवार के लिए एक बड़ा सबक बन गई। मितु ने अब मोबाइल का इस्तेमाल पढ़ाई और जरूरी कॉल्स तक ही सीमित कर लिया था। रमण ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया और अब अपने दोनों बच्चों के मोबाइल का एक्सेस अपने फोन से जोड़ लिया। वह भी उन पर नजर रखने लगे थे।
आज महीनों बाद मीना को चैन की नींद आई थी। उन्होंने महसूस किया कि अब उनका परिवार सुरक्षित है और दोनों बेटियों पर निगरानी रखने के कारण वह अब पहले से ज्यादा ध्यान से अपनी जिंदगी जी रहे थे।

लेखिका – अल्पना सिंह

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