मैं किसी की जरुरत नहीं ख्वाहिश बनाना चाहती हूँ,
मंजू दीदी के घर
में आज काफी चहल-पहल थी, और आखिर हो भी क्यों न, आज उनकी इकलौती बेटी की शादी जो थी। मंजू
दीदी मेरी कोई सगी बहन नहीं हैं, लेकिन सगी से कम
भी नहीं हैं। आज से छ: महीने पहले मंजू दीदी के घर मातम जैसा माहौल था, सिम्मी के एंगेजमेंट टूट जाने की वजह से।
आज से करीब छह
महीने पहले जब मैं स्कूल में अपनी क्लास ले रही थी, तब करीब 12 बजे मंजू दीदी का
फोन आया।
"हलो... हलो मंजू
दीदी, कहाँ हैं आप? आज आप स्कूल नहीं आई?"
मंजू दीदी रुंधे
गले से बोलीं, "हैलो, मनु, मैं सिम्मी को लेकर अस्पताल में
हूँ।"
मनु आश्चर्य से
पूछती है, "अस्पताल में! मंजू दीदी, क्या हुआ सिम्मी को?"
मंजू बोलीं, "सिम्मी की तबियत बहुत खराब है।"
मनु चौंकते हुए
बोली, "व्हाट! किस अस्पताल में हैं आप? मैं अभी आती हूँ।"
मनु भागते हुए
अस्पताल पहुँच जाती हैं।
मनु चुटकी लेते
हुए बोली, "क्या हुआ मंजू दीदी? सिम्मी को अचानक से क्या हो गया? कुछ ही दिनों में सिम्मी की शादी होने
वाली थी, और अब उसकी तबियत खराब हो गई।"
मंजू दीदी रोते
हुए बोलीं, "मनु, सिम्मी का रिश्ता टूट गया है, इसी बात से सिम्मी परेशान रहने लगी थी। सिम्मी की बीमारी का
कारण यही रिश्ता टूटना ही है।"
मनु आश्चर्य से
बोली, "क्यों! ये रिश्ता क्यों टूट गया?"
मंजू उदास होते
हुए बोलीं, "उस लड़के ने शादी करने से मना कर दिया।
वह कहता है कि उसे जैसी लड़की चाहिए, सिम्मी वैसी नहीं है।"
मनु गुस्से से
बोली, "सिम्मी वैसी लड़की नहीं, इसका क्या मतलब? और जब एंगेजमेंट करने आए थे, तब उनकी आँखें बंद थीं क्या?"
मंजू रोते हुए
बोलीं, "मनु, मुझे कुछ नहीं पता, क्या हुआ, कैसे हुआ, लेकिन लड़के ने रिश्ता तोड़ दिया। तेरे
जीजा जी बहुत परेशान हैं, उन्होंने तो वकील भी बुला लिया है
लड़केवालों पर धोखाधड़ी का केस करने के लिए।"
मनु की बात सुनकर, मनु सिम्मी के पास बेड पर जाकर बैठ जाती
हैं और बड़े प्यार से सिम्मी के हाथों को अपने हाथों में लेकर धीरे से बोलती हैं, "क्या हुआ सिम्मी?"
सिम्मी धीरे से
अपनी पलके खोलकर मनु की ओर देखती है और बोलती है, "मौसी, ये रिश्ता
उन्होंने नहीं, मैंने तोड़ दिया है, क्योंकि इस शादी में उन्हें थोड़ी भी
रुचि नहीं थी। उन्होंने कहा कि वह यह शादी अपने घरवालों के दबाव में आकर कर रहे
हैं, उन्हें मेरे जैसी लड़की पसंद नहीं है।
मौसी, मैं किसी की जरूरत नहीं, ख्वाहिश बनना चाहती हूँ, लेकिन मेरे मम्मी-पापा भी मेरी बात को
समझ नहीं रहे। आप देख रही हैं ना, पापा-मम्मी केस
करने की बात कर रहे हैं।"
यह सुनकर मनु चौंक
जाती है और मंजू के पास जाकर बोलती है, "ये सिम्मी क्या बोल रही है दीदी? जब सिम्मी को यह रिश्ता मंजूर नहीं था, तो आप लोग क्यों यह रिश्ता जोड़ना चाहते
हैं?"
मंजू रोते हुए बोलीं, "सिम्मी को यह रिश्ता मंजूर था, लेकिन उस लड़के और उसके घरवालों ने हमें
धोखे में रखा।"
मनु बोली, "मंजू दीदी, जो भी हो, लेकिन अब यह
रिश्ता सिम्मी को भी पसंद नहीं है, बात को आगे बढ़ाने से क्या फायदा?"
मंजू बोली, "यह कैसी बात कर रही हो, मनु? कितनी बदनामी होगी हमारी, सारे रिश्तेदारों को पता चल गया था, सारी तैयारी हो चुकी थी, और अब उस लड़के ने रिश्ता तोड़ दिया। उस
लड़के ने हमें कहीं का नहीं छोड़ा।"
मनु गुस्से से
लगभग चीखते हुए बोली, "मंजू दीदी, आप कैसी बात कर रही हैं? कैसी बदनामी? उस लड़के ने कुछ नहीं किया, उसने तो केवल अपनी बात बता दी। आप लोगों ने ही सब किया।
शादी के बाद दोनों के बीच लड़ाई होती, तो आपको अच्छा लगता क्या? अच्छा हुआ जो उसने शादी के पहले ही यह रिश्ता तोड़ दिया।
मंजू दीदी, आप इतनी पढ़ी-लिखी होकर ऐसी बातें करती
हैं। आप लोगों की वजह से सिम्मी बीमार है। आपको सिम्मी को समझाना चाहिए, उसे संभालना चाहिए, जो हुआ वह ठीक हुआ।"
मंजू नीचे सिर किए
हुए मनु की बातें सुन रही थीं, फिर अपने आंसू
पोछते हुए बोलीं, "शायद तू सही बोल रही है, जिंदगी में कितने लोग मिलते हैं और फिर
बिछड़ जाते हैं। एक वह दिन था और एक आज का दिन, सिम्मी की शादी हो रही है। खुद सिम्मी ने एंगेजमेंट के बाद
तीन महीने का वक्त माँगा था एक-दूसरे को समझने के लिए और फिर आज धूमधाम से सिम्मी
की शादी हो रही है।"
लेखिका-अल्पना सिंह
nice story
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