सुबह की चाय,
दिन-रात की तरह, मौसम की तरह।
लोग भी बदलते गए,
पर तुम वही रहे,
और वही रही सुबह-सुबह की चाय।
ना बदला इसका गहरा कथ्थई रंग,
ना बदली इसकी मीठी-मीठी दिलकश मिठास।
ये तेरे हाथों का जादू है,
या तेरे प्यार का रंग,
आज तक समझ नहीं पाया।
शायद मैं उलझा हुआ हूं तुममें,
या तुम सिमटी हो मुझमें,
इस चाय की तरह।
ज़िंदगी में ताजगी के रंग भर देती है ये सुबह की चाय,
थकी-थकी आँखों में चमक जगा देती है ये सुबह की चाय।
हल्की गुलाबी ठंड में गर्माहट का अहसास कराती है,
हर घर के कोने को कथई रंग से सजाती है ये सुबह की चाय।
बेस्वाद ज़िंदगी को नए स्वाद का अहसास कराती है,
थके मन को तरोताजा कर जाती है ये सुबह की चाय।
हर सुबह को खास बनाती है ये सुबह की चाय,
सच में, ज़िंदगी का एक अनमोल हिस्सा है ये सुबह की चाय।
सुबह की चाय में कुछ खास बात होती है,
हर घूंट में तेरी यादों की मिठास होती
है।
हल्की धूप, ठंडी हवा, तेरा ख्याल—
तेरे पास होने का एहसास होता है,
हर
सुबह की चाय में।
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