शिव स्तुति
शिव स्तुति
हे आदिनाथ शम्भू, भोलेनाथ, कृपा करो हे नागनाथ!
तेरी शरण में खड़े हैं, दोनों हाथ जोड़कर,
हे प्रभु! देवों के देव महादेव, हमारे कष्ट हरो।
हे दिगंबर, हे भूतनाथ, हे नाथों के नाथ, कृपा करो!
अमृत को ठुकराया तुमने, विष पीकर नीलकंठ कहलाए,
शांत होकर भी जिसकी गूंज चारों दिशाओं में गूंजती है।
हे विश्वनाथ! तू ही शोर है, तू आकाश, तू पाताल,
तू ही शून्य, तू ही अनंत, तू ही आदि, तू ही अंत।
हे महादेव, हे गंगाधर, कृपा करो, हे पशुपतिनाथ!
तू पतन भी है, तू विकास भी,
तू तामस भी, तू प्रकाश भी।
तू रुद्र भी, तू विनाश भी,
तू खंड भी, तू अखंड भी।
तू ही प्रचंड है, तू ही शांति भी,
तू काल भी है, तू महाकाल भी।
तू प्राण भी, तू शरीर भी,
तू पूर्ण भी, तू अपूर्ण भी।
तू शेष भी, तू विशेष भी।
हे नटराज, हे पार्वतीपति, कृपा करो, हे आदिनाथ!
हर हर महादेव! जय शिव शंकर!
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