यादें

यादों की परतें: कुछ खट्टी, कुछ मीठी...


कभी-कभी जीवन की भागदौड़ में हम रुकते हैं, पीछे मुड़कर देखते हैं — तो कुछ धुंधली, कुछ चमकती यादें हमारे भीतर दस्तक देती हैं। ये कविता उन्हीं पलों की एक भावनात्मक तस्वीर है, जिन्हें वक़्त ने हमारी आत्मा में सहेज लिया है...


यादें... कुछ खट्टी, कुछ मीठी

कुछ खट्टी, कुछ मीठी यादें,

कुछ थकी हुई, कुछ यादों में लिपटी यादें,

कुछ पुरानी, अनकही...

अनछुई, अनसुलझी यादें।

शब्दों से परे,

आसमान से ऊँची,

पर ज़मीन से जुड़ी ये यादें —

कभी मन को टटोलती हैं,

तो कभी मन को सँभालती,

कुछ धुंधली-सी यादें।

कहाँ से चल कर कहाँ आ गए हैं हम,

पीछे मुड़कर क़दमों के निशान दिखाती यादें।

जीवन के इस सफर में

कई लोग मिले,

कुछ साथ चले,

कुछ बिछड़ गए...

सफलता की मुस्कान,

असफलता की टीस —

हर मोड़ पर कुछ न कुछ

सहेजती चली गईं ये यादें।

आख़िर में —

बस यादें ही साथ रह गईं... 

लेखिका: अल्पना सिंह

#यादें #कविता #पुरानी_डायरी #भावनाएँ #HindiPoetry



Comments

Popular Posts