डिजिटल इश्क़ — एक अनदेखा सच,



डिजिटल इश्क़ एक अनदेखा सच

"एक कॉफी शॉप में हुई मासूम सी बातचीत ने एक शादी के मंडप में बड़ा खुलासा कर दिया। ये है डिजिटल प्यार के पीछे छुपी खतरनाक साज़िश की कहानी।"

 

(लघु कथा सामाजिक चेतना)      

आजकल प्यार का नया रूप
स्क्रीनशॉट में मिल जाता है
इज़हार — WhatsApp के मैसेज में,
इंतज़ार वीडियो कॉल पर।

और अंत
रेलवे स्टेशन की पटरियों पर,
किसी नाले या कचरे के पास
बिखरे टुकड़ों में मिल जाता है।

आज रूही की शादी की सालगिरह थी।
मिलिंद ने उसे कॉफी शॉप में बुलाया था
दोनों कुछ समय अकेले बिताना चाहते थे,
घर-परिवार और बच्चों से दूर,
बस एक-दूसरे के साथ।

रूही समय पर कॉफी शॉप पहुँची।
मिलिंद, हमेशा की तरह, देर से आने वाला था।
टेबल पहले से बुक थी,
तो वह कुर्सी पर बैठकर मोबाइल निकाल
YouTube
शॉर्ट्स देखने लगी।

तभी पास वाली टेबल से
धीरे-धीरे आती आवाज़ उसके कानों में पड़ी।
पीछे मुड़कर देखा
एक लड़का और लड़की आमने-सामने बैठे थे।
लड़की का चेहरा उतरा हुआ था,
पलकों पर नमी थी।
वे दोनों प्रेमी लग रहे थे।

लड़का धीरे से बोला
"
बहुत प्यार करता हूँ तुमसे
लेकिन थोड़ा वक़्त चाहिए…"

लड़की ने भीगी आवाज़ में कहा
"
वक़्त ही तो नहीं है
चौबीस की हो गई हूँ,
पापा शादी की बात कर रहे हैं।"

लड़के ने उसके होंठों पर हल्के से हाथ रख दिया
"
नहींऐसा मत कहो।
मैं तुम्हारे बिना जी नहीं पाऊँगा।"

लड़की की आँखें और भर आईं
"
मेरा भी वही हाल है
मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।"

एक पल को खामोशी छा गई।
फिर लड़का बोला
"
कुछ तो करना होगा
थोड़ी जुदाई, थोड़ा इंतज़ार
अगर सह लिया, तो बात बन सकती है।"

लड़की ने उम्मीद से पूछा
"
कैसे? कोई प्लान है?"

लड़का उसकी हथेलियाँ दबाकर बोला
"
हाँ, हैअगर तुम साथ दो तो।"

लड़की विश्वास के साथ बोली
"
मैं तुम्हें पाने के लिए कुछ भी कर सकती हूँ।"

लड़का
"
तो शादी के लिए हाँ कर दो
बाकी मैं देख लूँगा।"

दोनों की नज़रें मिलीं
मानो बिना शब्दों के ही
एक योजना तय हो गई हो।
फिर वे वहाँ से चले गए,
पर उनकी बातें रूही के मन में गूंजती रहीं।

तभी मिलिंद आ गया।
रूही को उदास देख उसने पूछा
"
क्या हुआ? इतनी चुप क्यों हो?"

रूही ने पूरी बात बताई।
मिलिंद हँसकर बोला
"
अरे, तुम भी न!
आजकल शॉर्ट वीडियो बनाने का जमाना है,
शोहरत के लिए लोग कुछ भी कर लेते हैं।
कोई पागल यूट्यूबर होगा।
चलो, टेंशन छोड़ो।"

उसके बाद दोनों ने कॉफी पी,
रात का खाना होटल में खाया
और बच्चों के लिए पैक करवा
घर लौट आए।

कुछ दिन बाद

मिलिंद
"
रूही, कल मेरे ऑफिस के दोस्त की बेटी की शादी है,
लेकिन गाँव से माँ का फोन आया है
पिता जी की तबीयत खराब है।"

रूही
"
क्या हुआ उन्हें?"

मिलिंद
"
अभी तो जाकर देखना होगा
लेकिन तुम मेरे दोस्त के घर चली जाना।"

रूही
"
मैं किसी को नहीं पहचानती वहाँ…"

मिलिंद ने बीच में ही बात काट दी
"
तुम नहीं पहचानती, लेकिन वो तुम्हें पहचानते हैं।
बस जाकर उपस्थिति लगा देना
और हाँ, एक अच्छा सा गिफ्ट ले जाना।"

मन न होते हुए भी रूही ने हामी भर दी।
अगले दिन तैयार होकर
गिफ्ट लेकर शादी में पहुँची।

फूलों से सजा मंडप,
चारों ओर रौनक,
रिश्तेदारों की चहल-पहल,
और शहनाइयों की गूंज

दरवाज़े पर लड़की की माँ ने स्वागत किया
और अंदर ले गईं।

सामने
दुल्हन खड़ी थी।
उसकी नज़र रूही से मिली।
वह मुस्कुराई और प्रणाम किया।

रूही ने आशीर्वाद दिया,
गिफ्ट थमाया
पर जैसे ही चेहरा गौर से देखा
वह चौंक गई।
ये तो वही कॉफी शॉप वाली लड़की थी!

रूही का दिल धड़क उठा।
मन में वही पुरानी बातचीत गूंजने लगी
"
थोड़ी जुदाई, थोड़ा इंतज़ार…"

क्या यही था उनका इंतज़ार?
क्या ये शादी उसी "प्लान" का हिस्सा थी?

रूही चाहती तो
दुल्हन के माता-पिता को सब बता सकती थी,
लेकिन चुप रही।
बस जाकर जयमाल स्टेज के सामने बैठ गई।

बारात आ गई।
दूल्हे को देखा
भोला-भाला, मासूम चेहरा
शायद उसे कुछ भी नहीं पता था।

रूही का दिल बेचैन हो उठा
"
अगर इस लड़की का प्लान सफल हो गया,
तो इस मासूम का क्या?"

भीड़, शोर, सजावट में
उसकी आवाज़ दब जाएगी
ये सोचकर वह चुपचाप हॉल से बाहर आ गई।

बाहर सड़क पार दो पुलिसवाले खड़े थे,
भीड़ और ट्रैफिक संभालने के लिए।

रूही के मन में ख्याल आया
"
क्या ये मदद कर सकते हैं?"

तभी उनमें से एक पुलिसवाले ने
रूही के चेहरे के भाव देख
पूछा
"
मैडम, कोई समस्या है?
मदद चाहिए?"

रूही ने झिझकते हुए
उसे किनारे ले जाकर
कॉफी शॉप में सुनी पूरी कहानी बता दी।

पुलिसवाले ने गंभीर होकर पूछा
"
कोई सबूत है?"

रूही ने सिर हिलाया
"
नहींअगर होता तो अब तक सामने आ चुका होता।
बस इतना जानती हूँ कि
वो लड़का मासूम है।"

पुलिसवाले ने तुरंत मोबाइल से कॉल किया।
करीब एक घंटे बाद
एक कॉन्स्टेबल आया।

तीनों अंदर गए।
दोनों परिवारों को बुलाया गया।
कॉफी शॉप का CCTV फुटेज दिखाया
जिसमें लड़की और उसका प्रेमी नज़र आ रहे थे।

सख्ती से पूछताछ हुई।
लड़की टूट गई
और सारी बात कबूल कर ली।

कुछ देर बाद प्रेमी भी पकड़ लिया गया।

पुलिसवाले ने कहा
"
आप सब खुशकिस्मत हैं
कि इस मैडम ने समय रहते हिम्मत दिखाई।
वरना न जाने क्या हो जाता।"

एक अप्रत्याशित अंत,
जिसने न केवल रूही को,
बल्कि लड़की के माता-पिता और समाज को
झकझोर दिया।

 लेखिका- अल्पना सिंह 

 


 


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